लोककथाओं और आदिवासी मौखिक परंपराओं का संरक्षण: डिजिटल संग्रहण की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

Authors

  • Sandhya E. N Author

DOI:

https://doi.org/10.63090/IJILRS/3108.1797.0017

Keywords:

डिजिटल संरक्षण, मौखिक परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर, डिजिटल मानविकी, सांस्कृतिक संवेदनशीलता

Abstract

यह शोध-पत्र भारतीय लोककथाओं और आदिवासी मौखिक परंपराओं के डिजिटल संरक्षण से जुड़ी समसामयिक चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण के दबाव में तेजी से विलुप्त होती मौखिक परंपराओं को बचाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभरी है। यह अध्ययन तकनीकी, सांस्कृतिक, भाषायी और नैतिक आयामों का समग्र मूल्यांकन करता है। शोध में पाया गया है कि जहाँ डिजिटल संग्रहण असीमित संभावनाएँ प्रदान करता है, वहीं सांस्कृतिक संदर्भ का नुकसान, तकनीकी पहुँच की असमानता, बौद्धिक संपदा अधिकारों की जटिलता  और प्रामाणिकता बनाए रखने की चुनौतियाँ गंभीर बाधाएँ उत्पन्न करती हैं। पत्र में सुझाव दिया गया है कि समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण, बहुभाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सांस्कृतिक संवेदनशीलता से युक्त तकनीकी हस्तक्षेप ही टिकाऊ संरक्षण सुनिश्चित कर सकते हैं। यह शोध भारतीय संदर्भ में डिजिटल मानविकी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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Published

2026-03-25

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Section

Articles